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उड़ान ने बाल विवाह निषेध हेतु किया जागरूक, दिलाई शपथ

अलीगढ़ ६ मई : शासन की मंशा के अनुरूप अक्षय तृतीया (अखतीज) के अवसर पर होने वाले विवाह समारोह में बाल विवाह रोकने के लिए उड़ान सोसाइटी द्वारा संचालित चाइल्ड लाइन की टीम सदस्यों द्वारा जिला बाल संरक्षण इकाई, महिला हेल्पलाइन, महिला शक्ति केंद्र एवं स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त तत्वाधान में शहरी स्वास्थ्य केंद्र नौरंगाबाद पर आशा संगनियों को बाल विवाह को रोकने हेतु जागरूक किया | कार्यक्रम के उपरांत सभी को बाल विवाह सम्बन्धी शपथ भी दिलाई गयी |

देश भर अक्षय तृतीया का त्यौहार सात मई को मनाया जायेगा | अक्षय तृतीया पर विवाह शुभ माना जाता है | इसी क्रम में पूरे देश में बाल विवाह भी भारी तादाद में होते हैं | इसलिए बाल विवाह निषेध अधिनियम 2006 के अनुपालन में पूरे देश भर में बाल विवाह रोकने हेतु जनजागरूकता चलाकर समाज के सभी वर्गों में बाल विवाह जैसी कुरीति के विरुद्ध लोगों को जागरूक किया जाता है |

आज शहरी स्वास्थ्य केंद्र नौरंगाबाद पर चिकित्साधिकारी डॉ राम्या की अध्यक्षता में बाल विवाह हेतु जनजागरूकता फ़ैलाने के लिए बैठक का आयोजन किया गया | डॉ राम्या ने बाल विवाह के उपरांत बनने वाली माँ के स्वास्थ्य पर पड़ने वाली असर को विस्तार से समझाया |  इस अवसर पर बोलते हुए बाल संरक्षण इकाई की हितेश कुमारी ने बाल विवाह के उपरांत एक बालिका एवं बालक पर पड़ने शारीरिक एवं मानसिक कुप्रभावों पर प्रकाश डाला | विधि सह परिवीक्षा अधिकारी रेशमा अय्यूब ने बाल विवाह के कानूनी पहलुओं पर विचार रखे | उन्होंने बताया कि बाल विवाह होने की दशा में कराने वाले लोगों एवं सभी शामिल लोगों  को दो साल के सश्रम कारावास एवं एक लाख के अर्थदंड का प्रावधान है | सीमा अब्बास ने इस हेतु महिला हेल्पलाइन नंबर से संपर्क करने हेतु बताया | चाइल्ड लाइन की टीम सदस्य नीलम सैनी ने बताया कि चाइल्ड लाइन द्वारा अब तक पचास से अधिक बाल विवाह रोकने में अपनी भूमिका निभाई है | अंत में सभी को बाल विवाह रोकने हेतु शपथ दिलाई है | कार्यक्रम को सफल बनाने पीएसआई के अब्दुल बासित फारूकी, विक्रम माथुर, शिमला, नर्गिस खान, सीमा कुमारी, बॉबी, निर्मल देवी आदि का महत्वपूर्ण योगदान दिया |

कार्यक्रम का संचालन उड़ान सोसाइटी के अध्यक्ष ज्ञानेंद्र मिश्रा ने किया |

फोटो : कार्यक्रम के संबोधित करती विधि सह परिवीक्षा अधिकारी रेशमा अय्यूब एवं बाल विवाह निषेध हेतु शपथ लेते हुए आशा संगिनी

In the auspicious week surrounding Akshay Tritiya when weddings are on a rise, the instances of Child marriage also upsurge. In the light of which a meeting was conducted by the team members of Udaan foundation, Members of the women helpline (181) and child helpline (1098) and doctors for the Aasha workers at Naurangabad Shehri Swasthya Kendra, Aligarh. The agenda of the meeting was to create awareness and advertise the campaign against Child marriage. The members of the aforementioned organizations discussed various issues with the health centre workers such as:
◆ basic information about child marriage and informing them that a marriage between a boy below the age of 21 years and a girl below the age of 18 would come under the purview of Child marriage
◆ the various laws and act (Mainly Prohibition of Child Marriage Act, 2006) and punishments and penalties related to people found of conducting a child marriage could be subjected to.
◆ the various reasons as to why are Child marriages prevalent in India
◆ the psychological and physical impacts on the mind and body of the male and female children who have been married before coming of age
◆ the consequences of such marriage (financial, psychological, physical on the economy, lives, body and mind of the young partners)
◆ information related to the women and child helpline numbers and organizations where one could approach in such cases.
The workshop was an informative and educational experience for both the speakers and the listeners and we hope it creates an impact in their lives

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