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इसे सिर्फ सिलाई मशीन मानने की भूल मत कीजियेगा साहब !

अलीगढ़ 3 फ़रवरी : उड़ान सोसाइटी के कार्यालय पर आई मीना के सामने रखी इस सिलाई मशीन को देखकर आप सोच रहे होंगे कि इसमें इतनी बड़ी बात क्या है | लेकिन साहब यह सिर्फ एक सिलाई मशीन नहीं है, बल्कि मीना की उम्मीदों के पंख भी शायद इसी मशीन से सिले जाने है | क्योंकि तीन भाई बहनों में मझली मीना की कहानी ही कुछ ऐसी है, जिस सुनकर हर किसी के शरीर में सिरहन पैदा हो जाये |

जिस बेटी के सर से पिता का साया सिर्फ १० वर्ष की उम्र में उठ जाए और माँ को भी भगवान् ने दो वर्ष पूर्व अपने पास बुला लिया हो, ऐसे में यह सिलाई मशीन ही तो उसके जीने का सहारा बनेगी | अलीगढ़ की मलिन बस्ती में 1000 रूपये के मकान का किराया देने के लिए जिन बच्चों को अपना बचपन खोना पड़े, पिता की मृत्यु हो जाने के कारण अपनी पढाई छोड़नी पड़े, उनके लिए इस सिलाई मशीन में बहुत सारी उम्मीदें छुपी है |

और शायद इसीलिए, हमने उड़ान सोसाइटी की शुभचिंतक रिटायर्ड बैंककर्मी सुनीता गुप्ता जी से एक छोटा सा निवेदन किया कि एक बालिका के जीवन में रोशनी लाने के लिए एक सिलाई मशीन की आवश्यकता है, तो उन्होंने सहर्ष ही अपनी माँ की यादगार स्वरुप रखी इस सिलाई मशीन को देने में कोई देर नहीं लगाईं | जी हाँ, आप सही समझे, इस मशीन में सुनीता जी की माँ की याद भी छुपी है |

इस मशीन में हमारी चाइल्ड लाइन की टीम सदस्य बॉबी जी द्वारा इस बालिका से संपर्क और हमारी स्वयंसेवक तन्वी गौतम व् नीरू द्वारा इस सिलाई मशीन को सुनीता जी से लेने से लेकर इसे ठीक कराने के लिए एक माह तक किये गए अथक प्रयास भी छुपे है |

साथ ही इस मशीन में उड़ान सोसाइटी की पूरी टीम की छोटे छोटे प्रयासों से बदलाव लाने के लिए  प्रतिबद्धता की झलक भी है और यह जूनून भी कि ‘साथी हम लड़ेंगे तेरे लिए’ |

इसलिए हम कह रहे हैं कि इसे सिर्फ एक सिलाई मशीन मानने की भूल मत कीजियेगा |

हमारे इरादे तो अपने समाज और अपने लोगों के लिए स्पष्ट है, लेकिन आपका क्या ख्याल है साहब ?

जय हिन्द ……………..

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