जीआरपी व् चाइल्ड लाइन की मदद से सात माह बाद मिला बालिका का पता

April 29, 2018 Shantanu Manohar No comments exist

अलीगढ़ २८ अप्रैल : सात माह बाद नवनिर्मित घरों में लोहे की सरिया बाँधने वाले मजदूर हेमंत मंडल की साढ़े चार वर्षीय बेटी का सुराग मिला तो उसकी ख़ुशी का ठिकाना न रहा | हेमंत व् उसकी पत्नी शेखा देवी ने अलीगढ़ चाइल्ड लाइन व् जीआरपी का, उसकी खोई हुए बेटी को मिलवाने हेतु किये गए प्रयासों के लिए, कोटि कोटि धन्यवाद दिया |  प्राप्त जानकारी के अनुसार बिहार के जिला कटिहार निवासी हेमंत कुमार मंडल गुडगाँव में मजदूरी करता है | वह अपने भाई मिथुन मंडल व् परिवार के तीन बच्चों के साथ उन्नीस सितम्बर २०१७ को कटिहार से आनंद विहार जाने वाली सीमांचल एक्सप्रेस में बैठा | ट्रेन के कानपुर आने से पहले रात में सभी ने खाना खाया और सो गए | जब ट्रेन अलीगढ़ जंक्शन को पार कर आगे निकली तो मिथुन ने देखा कि भतीजी राजनन्दनी ट्रेन में नहीं है | रात होने के कारण दोनों भाई कुछ कर न सके और दिल्ली उतारकर बालिका की गुमशुदगी लिखाने रेलवे स्टेशन गए | जहाँ उन्हें कानपुर में रिपोर्ट दर्ज करने की कह कर भेज दिया गया | हेमंत अगले दिन कानपुर आया व् बालिका की गुमशुदगी दर्ज कराई | कानपुर जीआरपी ने विवेचना के दौरान, हेमंत के बताये हुए, बालिका के खोने के समय को ध्यान में रखते हुए, मामले को अलीगढ़ जीआरपी में ट्रान्सफर कर दिया | जीआरपी सब इंस्पेक्टर संजय सिंह ने मामले की छानबीन करते हुए लगभग दो हफ्ते पूर्व चाइल्ड लाइन से संपर्क किया व् साथ ही बालिका के विषय में पुराना रिकॉर्ड देखने का अनुरोध किया | बालिका के पिता हेमंत मंडल को चाइल्ड लाइन कार्यालय बुला बालिका का फोटो दिखाया गया तो उसने राजनन्दनी को पहचान लिया | चाइल्ड लाइन की टीम बालिका के सम्बन्ध में २८ सितम्बर २०१७ को समाचार पत्रों के माध्यम से सूचना प्रसारित करवा चुकी थी | बालिका चाइल्ड लाइन को जीआरपी के माध्यम से बीस सितम्बर २०१७ को प्राप्त हुई थी | जिसका पता न मिल पाने के कारण बाल कल्याण समिति के आदेशानुसार अक्टूबर माह में राजकीय शिशु गृह आगरा भिजवा दिया गया था | आज बालिका के परिजन बाल कल्याण समिति का सुपुर्दगी आदेश लेकर राजकीय बाल गृह गए जहाँ छ: माह से रह रही राजनन्दनी को परिजन के सुपुर्द कर दिया गया |   

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